Tuesday, 3 September 2013

जब, सत्ता, मेवा, जयते – सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (सत्यम) (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), जब भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और भारत निर्माण के मेक अप से देश की सुंदरता का बखान हो रहा है (सुंदरम है ), – दोस्तो... यही डूबते देश की कहानी है,



जब, सत्ता, मेवा, जयते सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (सत्यम) (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), जब भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और भारत निर्माण के मेक अप से देश की सुंदरता का बखान हो रहा है (सुंदरम है ), – दोस्तो... यही डूबते देश की कहानी है, यह देश की, लूट पानी है...., सत्य की खाल से, माफियाओ की ढाल बनी है , यह देश के बरबादी की मनमानी है .... आज भ्रष्टाचारी बने सत्ताधारी क्यो कि..., आज जनता के, जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद, और घुसपैठीयों के, वोट बैंक के शोलों से , सत्ताधारियों की भ्रष्टाचार की कढाई मे , इन शोलों की तपन से, रोज घोटालों की खिचड़ी पकाकर, देश के गरीबों का निवाला छीनकर..., देश के हर गली के गुंडे भी, इनके संरक्षक बनकर, मुसटंडे बन गए है...,दोस्तों, डूबते देश को बचाना है तो चलो राष्ट्रवाद की ओर (पहले मेरा देश), कहो और बनो....हम सब एक है .... (चित्र साभार इन्टरनेट से)