Sunday, 1 September 2013


दोस्तों , यह है... हमारे, देश के, अंधे राजा की कहानी है ...???, भारत तीसरी महाशक्ति लेकिन भूखमरी पाकिस्तान-श्रीलंका से भी ज्यादा.... क्या महाशक्ती के नारो से... क्या...???, अब भी, सत्ताखोरों की खत्म नही हुई.... देशवासियों को भरमाने की, इस झूठी कृती की बेईमानी ...???? 
भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की ताज़ा रिपोर्ट में विश्व के सबसे शक्तिशाली देशों में तीसरे नंबर पर गिना जा रहा भारत भूखमरी से लड़ने के मामले में चीन ही नहीं बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान और श्रीलंका से भी बदतर बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा जारी वैश्विक भूखमरी सूचकांक, 2010 में भारत को 67वां स्थान दिया गया है जो सूची में चीन और पाकिस्तान से भी नीचे है। श्रीलंका में हालात और बेहतर हैं और उसका नंबर 39वाँ है। आईएफपीआरआई ने जर्मनी के एक समूह, कंसर्न वर्ल्डवाइड एंड वेल्टहंगरहिल्फे (सीडब्ल्यूडब्ल्यू) के सहयोग से जारी किया है। 84 देशों की सूची में चीन नौवें और पाकिस्तान 52 वें स्थान पर रखा गया है।
अमरीका स्थित इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 122 विकासशील देशों के आँकड़ों के आधार पर एक भूख सूचकांक जारी किया है जिसमें कहा गया है कि भारत में कुपोषित बच्चों की संख्या 44 प्रतिशत है।
इस सूचकांक को देशों में बाल कुपोषण, शिशु मृत्यु दर और दो जून भरपेट भोजन न पाने वाली आबादी के आधार पर तैयार किया गया है। हाल ही में अमेरिका के नेशनल इंटेलीजेस कॉउंसिल (एनआईसी) और यूरोपीय संघ की संस्था यूरोपीयन यूनियन इंस्टिट्यूट फार सिक्यूरिटीज स्टडीज (ईयूआईएसएस) के अध्ययन में कहा गया था कि भारत अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा सबसे शक्तिशाली राष्ट्र है। विश्व शक्ति का 22 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका के पास है। जबकि 16 प्रतिशत चीन और आठ प्रतिशत भारत के पास है।
भारत को कुपोषण और भरण पोषण के मामले में महिलाओं की खराब स्थिति के कारण काफी नीचे स्थान मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व में 42 प्रतिशत पैदायशी कमजोरी भारत में हैं। इस मामले में पाकिस्तान (पांच प्रतिशत) की स्थिति बेहतर है।
दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेस में संस्था के एशिया निदेशक अशोक गुलाटी ने कहा कि इस सर्वेक्षण के तीन आधार थे – बच्चों की मृत्युदर, उनमें कुपोषण की स्थिति और कम कैलोरी पर जीवित रहने वाले लोगों की संख्या.
गौरतलब है कि भारत में कृषि पर निर्भर लाखों लोगों की दशा दयनीय है।
दक्षिण एशिया का सत्तर प्रतिशत भू-भाग भारत में ही है इसलिए इस अध्ययन में दक्षिण एशिया की स्थिति दयनीय बताई गई है।
भारत के पड़ोसी देशों – पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में बच्चों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।
इस भूख सूचकांक में चीन नौंवे नंबर पर है यानी वहाँ बाल मृत्यु दर बहुत कम है और बच्चों में कुपोषण भी अपेक्षाकृत कम है।
इस संस्था से जुड़े अख्तर अहमद ने कहा कि भारतीय समाज में असमानता ज्यादा होने के कारण ये स्थिति पैदा हुई है। साथ ही भूमि का असमान वितरण भी एक अहम कारण है।
कुछ वक्त पहले प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली में वरिष्ठ संपादकों से बातचीत में कहा था कि मुल्क की तरक़्क़ी के लिए ज्यादा से ज्यादा काश्तकारों को उनकी ज़मीन से निकालकर दूसरे पेशों में लगाना ज्ररूरी है।
अशोक गुलाटी इससे सहमत हैं और चीन की मिसाल देते हुए कहते हैं कि वहाँ भी काश्तकारों को दूसरे पेशों में लगाया गया है।
वे कहते हैं कि तरक्की का इतिहास हमें बताता है कि लोगों को खेती का काम छोड़ दूसरे पेशों में लगना होगा।
पिछले दिनों सरकारी गोदामों में हजारों टन अनाज के सड़ने की ख़बरें छपने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को हुक्म दिया था कि अनाज को ग़रीबों में बाँट दिया जाए। जिसके बाद मनमोहन सिंह ने न्यायालय के हुक्म पर टिपण्णी करते हुए कहा था कि यह हुकूमत के कामकाज में दखलंदाजी है।
इस रिपोर्ट के बाद कुछ लोग मनमोहन सिंह की पॉलिसी पर सवाल खड़े करेंगें।