Tuesday, 24 September 2013



क्या आप जानते है ? गुलामी के प्रतीक ! जन गण मन की कहानी …???? यह है हमारी गुलामी की अब तक की सच्चाईजन गण-मन से देश से लूटने का खेल, कैसे लूटने की जड़ मजबूत हो रही है…?? 

जाने सच्चाई जन गण मन की यह जनता को बरगला कर , भ्रष्टाचार से गुणा कर, सत्ता धारियों ने अपने मन (काले धन व वोट बैंक की राजनीति के तेल से , घुसपैठीयों सेसत्ता की मालिश कराकरअपने जिन्दगी को पालिश/चमकाकर ) को सत्ता का, मोहरा मानकर , अंग्रेजों की गुलामी से कई गुना ज्यादा लूट कर , अपना ऐसा काला रंग दिखा दिया है, कि … , जनता को भी ऐसा लग रहा है कियह तो एक कोयला है , हम कितने भी आन्दोलन से…. इसे धोयेंगे, तो भी… “सत्ताखोरों के मन से नहीं निकलेगा
जब तक इस देश का राष्ट्रीय गीतराष्ट्रवाद के भावना जागृत करना / कहना एक बेईमानी है....


१. जाने जन गण मन का शाब्दिक अर्थ...
इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है। हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो। तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा मतलब महारास्त्र, द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत,
उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है , तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है। तुम्हारी ही हम गाथा गाते है। हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो।
जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया।


२. और वन्देमातरम का शाब्दिक अर्थ...
(वन्दे मातरम का हिन्दी-काव्यानुवाद)
जलवायु अन्न सुमधुर, फल फूल दायिनी माँ!, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!
अति शुभ्र ज्योत्स्ना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।


यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!


हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।


अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!


हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!


तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।


अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!


हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।


गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!


हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!


हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!


जब तक देश की धरती के सम्मान की पूजा नहीं होगी..वन्देमातरम को राष्ट्रगान नहीं बनाया जाए... तब तक देश में राष्ट्रवाद की भावना लाना एक बेईमानी होगी. राष्ट्रवाद ज़िंदा नहीं रहेगा..., और देशवासी गरीबी से सत्ताखोरों, माफियाओं के शोषण के हथियार से मर-मर के जीने के जीवन से ही घुट-घुट कर जीकर, एक शोषण की गुलामी से ही जियेगा ...,
जागो देशवासियों राष्ट्रवाद की दीवानगी से से ही राष्ट्र की जिंदगानी है..., और दुनिया के देशवासी के खुशहाली की यही कहानी है...