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Wednesday, 26 June 2013






यह गरीबो का मज़ाक (म-महान, जाक- ज़ौक़) महान भ्रष्टाचारी नेताओ का जो महान ज़ौक़.(चूसक), बनकर इस 66 सालो का सबसे सुपरहिट जोक (चुटकुला) हे। यह भरे पेट नेताओ का मज़ाक (मझा हुआ जोक है)...???? 
संसद के सदस्यो की सालाना पगार 61 लाख है प्रतिदिन 17000 (संसद से गायब रहने पर भी), व उनके भोजनालय मे 300-500 रुपये की पेट भरी थाली, सिर्फ 12-18 रुपये मे मिलती है, पेट भरे भोजन के बाद सोये हुए सांसदो की संख्या आप समाचार वाहिनी मे देख सकते है। उन्हे, सुनहरे भ्रष्टाचार के सपने देखने मे भी , उनके वेतन मीटर चालू रहता है।
3 साल पहले मैंने एक नीजी समाचार वाहिनी मे, ज़ब, प्याज 80 रुपये प्रति किलो व अन्य तरकारियो के भाव बढ्ने पर, एक रिपोर्टर, जो मुख्य बाजार मे, बिंदी व मेकअप वाली स्त्रियो से पूछ रहा था,…”इस महंगाई के बारे मे आपका क्या विचार है?” उन स्त्रियो ने अपना चित्र टीवी मे आने से, गर्वित होकर मीठी मुस्कान, लाली लगे होठों से कहने लगी, ”क्या करे भाव इतने बढ़ रहे है। पहले हम एक किलो सब्जिया लेते थे , अब पाव किलो से गुजारा करेंगे।”
शरम करो ...??? क्या ॥ आपके विचार भी ऐसे है। याद रहे, देश के क्रांतिकारीओ जिन्होने अंग्रेज़ो से आजादी की लड़ाई मे, अपना बलिदान दिया था, वे भी खाते पीते घर के थे, और कभी उनके परिवार ने भोजन मे कटौती नही के थी ... ऐसे जाबाज़, जिनमे आजादी के संघर्ष के लिए ज़्जबा था , बिना सत्ता के लोभ मे अपना जीवन न्योछावर कर दिया... लेकिन, सत्ता परिवर्तन के बाद, वंशवादी जो आज देश के लिए दंशवादी ही साबित हुआ है, इस सत्ता परिवर्तन को आजादी का नाम देकर अपने को देश का मसीहा कहकर, सत्ता पर काबिज हो गए ...????????
उन क्रांतिकारियों ने सपने मे भी कभी नहीं सोचा होगा, देश की जनता वोट बैंक व भारत निर्माण के नारो से.... सत्ताखोर, देश को कर्ज के गर्त मे डूबो कर अंग्रेज़ो से भी भयंकर गुलामी का सामना करने के बावजूद , जनता को धर्मवाद, जातिवाद व तुस्टीकरण से भेड़ चाल से चला कर, नेताओ द्वारा डुबाये देश को दिखा कर, वोट बैंक को सर्वोपरि मानकर, जनता अपने जीवन की बरबादी की तरफ जाने के बावजूद भी आंखे बंद रखेंगी...????
आजा का स्लोगन बन गया है ....???? महंगाई के डगर पे, बिना देखते चलते रहना देशवासियों ...?? और फिसल फिसल कर अपने जीवन को घुट – घुट कर गवाना..????. ये देश है तुम्हारा॥ और इसके गुनाहगार, तुम्ही हो और तुम्ही हो.... आज और आने वाले कल के, ...???
जागो देशवासीओ ... इस घुटन से ... घुटने के बल, मत चलो...???? कर्ज की बीमारी को महंगाई की महामारी से, डूबते देश को बचाओ ...???.