Wednesday, 3 April 2013





क्या आप देश के दहाडते शेर बनना चाहते है?

डूबते देश को बचाइये , देश डूबा कम्युनिटी से जुडे....


राष्ट्रवाद- आओं…. इन शेरों में अपना खून डाले और वे देश के लिये दहाडे

1947 का सत्यमेव जयते .........1948.............. 2013 से अब तक ‘’सत्ता एक मेवा है और इसकी जय है’’ बन गया है

जिस देश को अपनी सस्क्रिती व भाषा पर नाज है, वह देश यदि राष्ट्रवाद की धारा मे आ जाये तो वह उन्नत देशो मे शामिल होता है,

विश्व के बर्बाद हुए देशों जैसे जर्मनी व जापान भी राष्ट्रवाद की धारा से विश्व मे अग्रणी देशो मे है, विश्व मे ढेर सारे देश है जो मानचित्र पर भी नजर नही आते है,वे हमारे से भी सम्पन्न है.

राष्टवाद के प्रतीक लालबहादुर शास्त्री

लालबहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री के कार्यकाल मे देश खाद्दान संकट से गुजर रहा था. लालबहादुर शास्त्री के 6 बच्चे थे, लालबहादुर शास्त्री ने देशवासियों से आवाहन किया कि सप्ताह मे एक दिन उपवास रखो, इस आवाहन से पहले उन्होने कहा कि मै यह प्रयोग पहले मेरे घर मे करता हूँ, यदि मेरा परिवार एक दिन बिना अन्न से रह सकता है तो मै राष्ट्र को कहूँगा , उनका यह प्रयोग दक्षिंण भारत ही नही पुरे देश मे सफल हुआ.

देशवासी उनके शब्दो के कायल थे, और लोगोसे आवाहन किया घर के आँगन व खाली जगह मे अनाज उगाओ ,और एक हरित क्राती व साथ श्वेत (दुध) क्रांती का उदय हुआ.

उसी तरह से परिवार नियोजन के प्रचार के बारे मे उन्होने देशवासियों से माफी मागी और कहा मेरे समय मे परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध नही थे. और उसका प्रचार के लिये उन्होने किसी और मंत्री को जिम्मा दिया.